आरओ-एआरओ प्री में भी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
इलाहाबाद प्रमुख संवाददातालोक सेवा आयोग की समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी भर्ती 2016 की प्रारंभिक परीक्षा (आरओ-एआरओ प्री) रविवार को हुई। आयोग की परीक्षाओं में प्रश्नों की गड़बड़ी को लेकर लगातार आ रही शिकायतों से सबक लेकर इसे ठीक करने के लिए आयोग ने इस परीक्षा में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ किया।इसका असर यह हुआ कि सामान्य हिन्दी के पेपर में पूछे गए प्रश्नों को समझने और उसका उत्तर देने में पढ़ाकू परीक्षार्थियों ने भी पसीना छोड़ दिया। पेपर का स्तर कैसा था इसे पीसीएस और लोअर जैसी परीक्षा का इंटरव्यू दे चुके एक परीक्षार्थी की इस प्रतिक्रिया से समझा जा सकता है-‘पिछले तीन-चार वर्षों में हुई आयोग की परीक्षाओं के पेपर की तुलना में आज की परीक्षा का दोनों पेपर सबसे स्तरीय था। दोनों पेपर काफी कठिन थे।’ परीक्षार्थियों ने बताया कि इस बार प्रश्नों का दोहराव बहुत कम था। आम तौर पर हर परीक्षा में 20 से 30 प्रश्न ऐसे होते हैं जो पिछली किसी परीक्षाओं में पूछे जा चुके होते हैं। लेकिन इस पेपर में ज्यादातर प्रश्न नए और तथ्यात्मक थे।विशेषज्ञ बदलने के मिल रहे संकेत: परीक्षार्थियों का कहना है कि प्रश्नों के चयन से ऐसा लग रहा है कि प्रश्नों को लेकर उठे विवाद के बाद आयोग ने विशेषज्ञ पैनल में बदलाव किया है। दूसरी पाली में हुए सामान्य हिन्दी के पेपर को परीक्षार्थी सबसे कठिन बता रहे हैं। इस पेपर में विलोम, पर्यायवाची, अनेक शब्दों के एक शब्द, वर्तनी, वाक्य शुद्धि, तत्सम-तद्भव से जुड़े 60 प्रश्न पूछे गए। प्लास्टिक की थैली पर सवाल : आयोग ने पेपर प्लास्टिक की थैली में भेजा था। कुछ परीक्षार्थियों का कहना था कि आयोग परीक्षा में पर्यावरण पर सवाल पूछ रहा। पेपर भेजने के लिए प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल कर रहा है।

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