
पहले हफ्ते में देने होंगे रोजमर्रा की जरूरतों के बिल, नोटों की किल्लत के बीच उपभोक्ता परेशान
एक तारीख आने को है...कहां से होगा सबका पेमेंट!
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889 बैंक हैं लखनऊ जिले में। िनरालानगर में खाली पड़े एटीएम के बाहर लोग इस उम्मीद में बैठे रहे कि कभी तो पैसा आएगा। कई बैंक अधिकारी इस बात से भी परेशान हैं कि उन्हें आरबीआई से पर्याप्त कैश नहीं मिल रहा है। गोपनीयता की शर्त पर कुछ अधिकारियों ने बताया कि ज्यादातर बैंकों में 100 रुपये के ही नोट हैं। दो हजार के नए नोट भी कम आ रहे हैं। 500 के नोट तो कुल करंसी के पांच फीसदी के भी बराबर नहीं हैं। इस बारे में कुछ अधिकारियों ने सोमवार को भी आरबीआई अधिकारियों से बात की है। एअरफोर्स पहुंचा रही नोट नई दिल्ली : दिसंबर के पहले हफ्ते में सैलरी देने के लिए करंसी नोटों को लेकर बड़े शहरों में आपाधापी न मचे, इसके लिए एअरफोर्स के विमानों से नई करंसी प्रमुख शहरों में पहुंचाने का काम तेज कर दिया गया है। प्रिंटिंग प्रेस में नए नोट तेजी से छापे जा रहे हैं, लेकिन उन्हें कम से कम समय में जनता तक पहुंचाने के लिए वित्त मंत्रालय ने सेना से अनुरोध किया था। अब एअरफोर्स ने सी17 ग्लोबमास्टर, सी130जे सुपर हर्क्युलिस और एएन32 जैसे विमान नोट ढुलाई में लगा दिए हैं। कुल कितने विमान लगाए गए हैं, इस पर वायु सेना चुप है। सूत्रों का कहना है कि सरकार की जरूरतों को ध्यान में रखकर हवाई जहाज दिए गए हैं। अब इनके फेरे बढ़ाए जा रहे हैं। जिले में सरकारी कर्मचारियों के अलावा प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को मिलाकर करीब दो लाख लोगों को 800 करोड़ रुपये सैलरी के तौर बंटते हैं। एक दिसंबर को लोग फिर सैलरी के लिए बैंक पहुंचेंगे। हालांकि, केंद्र सरकार ने बैंक से कैश निकालने की सीमा अधिकतम 24 हजार रुपये कर दी है फिर भी बैंकों को एक दिन में करीब 450 करोड़ रुपये तो हर हाल में चाहिए ताकि सैलरी निकल सके। करीब 80 हजार पेंशनर्स भी हैं जिनके परिवार पूरी तरह पेंशन पर ही निर्भर हैं। ऐसे में अगर उन्हें पैसा न मिला तो उन्हें भी तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। चिकन बाजार बेजार, हजारों कारीगर बेराेजगार 8पेज 2 • एनबीटी, लखनऊ : एक दिसंबर आने को है और गोमती नगर के विराज खंड में रहने वाली ज्योत्सना बहुत परेशान हैं। कहती हैं कि एक से तीन तारीख के बीच घर में कामवाली को डेढ़ हजार रुपये देने होते हैं। चौदह सौ रुपये बेटे की स्कूल वैन वाला लेगा। सोसायटी का मेंटीनेंस चार्ज डेढ़ हजार रुपये और धोबी व केबिलवाले का पेमेंट भी पहले हफ्ते में देना होता है। नोटों की किल्लत के बीच ये रुपये कैसे जुटेंगे, इसे लेकर उन्हें अभी से तनाव हो रहा है। ज्योत्सना की तरह, शहर में लाखों लोग परेशान हैं कि एक दिसंबर के बाद पहले हफ्ते में यह रकम वह कहां से देंगे। एटीएम से रुपये मिल नहीं रहे हैं और बैंकों में जो लिमिट तय की गई है, उसमें भी धक्के खाने के बाद रुपये मिलने में दिक्कत है। सैलरी डे भी बड़ी मुसीबत : बैंकिंग सेक्टर से जुड़े एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, हर महीने की पहली तारीख को बैंकों के पास "500 के नोट नहीं |
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