राजधानी के आठ नामी स्कूलों का गरीब छात्रों को दाखिला देने से इंकार
बीएसए ने की कानूनी कार्रवाई की मांग, मान्यता वापसी की लटकी तलवार
जागरण संवाददाता, लखनऊ: सरकारें भले ही शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के दावे करती हैं, लेकिन राजधानी के कई स्कूल इन सरकारी दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। राजधानी के आठ नामी स्कूलों में गरीब बच्चों को नर्सरी व कक्षा एक में दाखिला देने से इंकार किया जा रहा है। नतीजतन इन स्कूलों पर मान्यता वापसी की तलवार लटक गई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी ने संबंधित स्कूलों के बोर्ड सचिव को पत्र लिखकर गरीब बच्चों का इन स्कूलों पर अपने स्तर से नामांकन करवाने या फिर विधिक कार्रवाई करने की संस्तुति की है। इन आठ स्कूलों में 120 गरीब बच्चों के दाखिले होने हैं और स्कूल लगातार दाखिला देने से मना कर रहे हैं। ऐसे में अब शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। बीएसए प्रवीण मणि त्रिपाठी की ओर से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है कि दिल्ली पब्लिक स्कूल की इंदिरानगर शाखा में दो गरीब बच्चों का आरटीई के तहत दाखिला नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में इस स्कूल को दाखिला लेने के निर्देश दें या फिर अपने स्तर से विधिक कार्रवाई करें। वहीं सात स्कूलों पर कार्रवाई के लिए काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन के सचिव को पत्र लिखा गया है। इसमें सिटी मांटेसरी स्कूल की विभिन्न शाखाओं में 54 गरीब बच्चों, नवयुग रेडियन्स में 25 गरीब बच्चों, एक्जान मांटेसरी स्कूल में 14 गरीब बच्चों, महानगर स्थित डॉ. वीरेंद्र स्वरूप स्कूल में दो गरीब बच्चों, सिटी इंटरनेशनल स्कूल में 12 गरीब बच्चांे, सेंट मेरी इंटर कॉलेज जानकीपुरम में छह गरीब बच्चों व सेंट मेरी इंटर कॉलेज मटियारी में पांच गरीब बच्चों को निश्शुल्क दाखिला नहीं दिया जा रहा है। कुल 120 गरीब बच्चे दाखिले के लिए भटक रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय ने बीते दिनों आरटीई के तहत निश्शुल्क दाखिला दिलाने के लिए प्रदर्शन किया था। उनका कहना है कि अगर ठोस कार्रवाई न की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
Primary Ka Master नौनिहालों के दाखिले में आड़े आ रही गरीबी
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