राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के लिए केंद्र निर्धारण समय पर पूरा कराने का कोई भी कदम कारगर नहीं हो रहा है। पंजीकरण एवं परीक्षा फार्म जैसे अहम कार्य समय पर पूरा करा लेने वाला महकमा केंद्र निर्धारण में फिर असफल हो गया है। केंद्र बनाने की अंतिम तारीख बढ़ चुकी है, लेकिन जिस गति से कार्य हो रहा है उससे दिसंबर के पहले पखवारे में कार्य पूरा होना मुश्किल लग रहा है। माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2017 के लिए केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है। इस बार कंप्यूटर के जरिए यूपी बोर्ड मुख्यालय पर ही केंद्र निर्धारण होना था, लेकिन अंतिम समय में शासन ने तकनीक का साथ तो लिया, लेकिन इसमें जिला विद्यालय निरीक्षकों को पहले की तरह अधिकार सौंप दिए। कहा गया कि बोर्ड इसके लिए साफ्टवेयर तैयार कराएगा, जो बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड होगा। उसी पर जिला विद्यालय निरीक्षक केंद्रों की सूची अपलोड कराएंगे। इसे जिलाधिकारी से लेकर प्रमुख सचिव तक देख सकेंगे। शासन ने केंद्र स्थापना नीति घोषित करते हुए पूरा कार्यक्रम भी जारी किया था, इसमें 28 नवंबर तक केंद्र निर्धारण पूरा किए जाने का निर्देश था। अब तक जिला विद्यालय निरीक्षकों ने सभी जिलों की सूचनाएं तक अपलोड नहीं की हैं। सूत्रों की मानें तो अभी आधे जिले ही तैयारियां पूरी करते दिख रहे हैं। पिछले दिनों शासन स्तर पर हुई बैठक में केंद्र निर्धारण की समय सीमा बढ़ाकर चार दिसंबर कर दी गई है। साफ कहा गया है कि इस समय में हर हाल में काम पूरा हो जाए, लेकिन जिस तरह से तैयारियां चल रही हैं, उसे देखते हुए ऐसे आसार कम ही है। शासन ने सख्ती बरती तो दिसंबर का पहला पखवारा पूरा होने तक प्रक्रिया भी पूरी हो सकती है। असल में इस कार्य में लेटलतीफी का कारण जिला विद्यालय निरीक्षक ही हैं उनकी अपनी ‘शर्ते’ परीक्षा नीति पर भारी पड़ रही हैं। इसीलिए तकनीक भी फेल रही है। यूपी बोर्ड में लाखों छात्र-छात्रओं का कक्षा 9 व 11 का पंजीकरण एवं हाईस्कूल व इंटर के परीक्षा फार्म ऑनलाइन भरे जाते हैं। इसमें डीआइओएस की भूमिका सीमित होने से समय पर काम पूरा होता आ रहा है। हर साल की तरह केंद्र निर्धारण में अफसरों का पुराना रवैया ही बरकरार है। खास बात यह है कि विभागीय मंत्री एवं शासन के अफसर भी इस मुद्दे पर कड़े निर्देश देने से बच रहे हैं। सचिव शैल यादव ने कहा कि शासन ने जो समय सीमा तय की है उसी में केंद्र निर्धारण हर हाल में पूरा हो।
स्वच्छता के लिए सड़क पर उतरेगा यूपी बोर्ड
राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : प्रदेश के अहम शैक्षिक संस्थानों में शुमार माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी बोर्ड मुख्यालय के सामने कूड़ा यार्ड तमाम प्रयासों के बाद भी खत्म नहीं हो रहा है। अफसरों ने इसे अन्यत्र ले जाने का लिखित वादा किया था, लेकिन कई माह बाद भी उस पर अमल नहीं किया। स्वच्छता जैसे अहम मसले पर हीलाहवाली से परिषद के अधिकारी व कर्मी एकजुट होकर मंगलवार से आंदोलन की राह पर चलेंगे। परीक्षार्थियों की संख्या के लिहाज से यूपी ही नहीं दुनिया के सबसे बड़े माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड संस्थान की सेहत इन दिनों नासाज है। नगर निगम के अफसरों ने परिषद मुख्यालय के मेन गेट के सामने कूड़ा यार्ड बना दिया है, जहां तमाम मुहल्लों का कूड़ा-कचरा दिन भर उतरता और फिर दूसरे वाहनों में लादकर अन्यत्र भेजा जाता है। इससे यहां गंदगी के साथ ही सड़ांध का माहौल है। परिषद मुख्यालय के तमाम विभागों में कर्मचारी गंदगी के कारण बीमार हो रहे हैं। साथ ही उनका सांस लेना तक दूभर है। परिषद के अफसर ने दूसरे गेट की सड़क बनवा दी है, लेकिन फिर भी समस्या बरकरार है। बीते जून माह में कर्मचारियों ने सड़क जाम करके प्रदर्शन किया था, उस समय दोनों पक्षों में लिखित समझौता हुआ था कि जल्द ही कूड़ा यार्ड को अन्यत्र ले जाया जाएगा। पांच माह बीत रहे हैं अब तक इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। सोमवार को परिषद कर्मचारियों के प्रांतीय अध्यक्ष शिवजी श्रीवास्तव की अगुआई में कर्मचारी नगर आयुक्त शेषमणि पाण्डेय से मिलकर कूड़ा यार्ड हटाने की मांग की, कर्मचारियों का कहना है कि नगर आयुक्त ने फिलहाल इसे हटाने से इनकार किया है। इस पर मंगलवार से यहां आंदोलन शुरू हो रहा है। इसमें अधिकारी व कर्मचारी एक साथ प्रदर्शन करके धरना देंगे और यहां कूड़ा उतरने से रोकने की भी तैयारी है। कर्मचारियों का दावा है कि परिषद सचिव शैल यादव भी धरने पर बैठेंगी। इस मुहिम में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के मंडल अध्यक्ष सूर्य प्रकाश मिश्र, जिलाध्यक्ष अजय भारती, शिक्षा निदेशालय के मिनिस्टीरियल एसोसिएशन अध्यक्ष रंगनाथ मिश्र और परिषद के प्रांतीय महामंत्री बृजनंदन समेत तमाम संगठन साथ होंगे।

0 comments:
Post a Comment