राज्य ब्यूरो, लखनऊ : इस फैसले में भले ढेरों पेंच हों, मगर चुनावी ड्योढ़ी पर खड़ी उत्तर प्रदेश सरकार ने 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने का निर्णय लिया है। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। कैबिनेट ने 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में परिभाषित करके अनुमन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में यूं तो 74 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, लेकिन 17 अति पिछड़ी जातियों को एससी का दर्जा देने का फैसला महत्वपूर्ण है। इस निर्णय को लेकर भले तकनीकी पेंच तलाशे जा रहे हों, लेकिन समाजवादी सरकार ने इन जातियों की तकरीबन साढ़े 13 फीसद आबादी को पाले में करने का चुनावी दांव चल दिया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि ये 17 जातियां मूलरूप से केवल पांच जातियां हैं। इनका खानपान, रहन-सहन एक जैसा है। इनकी आर्थिक स्थिति भी दयनीय है। विधि विशेषज्ञों व महाधिवक्ता के अनुसार इन जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में परिभाषित करके व कार्मिक की अधिसूचना में एक बिंदु जोड़कर एससी को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधा दी जा सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद की अध्यक्षता में छह जुलाई, 2012 को पांच मंत्रियों की उपसमिति से 17 पिछड़ी जातियों पर रिपोर्ट मांगी थी। समिति ने फरवरी, 2013 में सरकार को सौंपी रिपोर्ट में कहा था कि इन 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में परिभाषित कर लिया जाए। साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा किये गए सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक अध्ययन की रिपोर्ट 18 बिंदुओं के साथ केंद्र सरकार को भेजी जाए। अखिलेश कैबिनेट ने 28 फरवरी, 2013 को संस्तुति पर अपनी मंजूरी देकर केंद्र सरकार को भेज दिया था। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रलय ने 22 जुलाई, 2015 को भेजे पत्र में इन जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में स्वीकार करने योग्य नहीं पाया था। अब अखिलेश यादव कैबिनेट ने इन जातियों को एससी के रूप में परिभाषित कर उसका लाभ देने का फैसला लिया है। राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में हुकुम सिंह की अध्यक्षता में गठित सामाजिक न्याय समिति के आंकड़े कहते हैं कि प्रदेश में केवट, मल्लाह, मछुआ, निषाद की आबादी 4.33 फीसद, कुम्हार, प्रजापति 3.24 फीसद, भर, राजभर 2.44 फीसद, कहार-कश्यप धीमर, बाथम, तुरहा, बिंद, गोड़िया की आबादी 3.31 फीसद के करीब है।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का बड़ा फैसला : उप्र में 17 अति पिछड़ी जातियों को एससी का दर्जा : ये अब एससी
23/12/2016
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का बड़ा फैसला : उप्र में 17 अति पिछड़ी जातियों को एससी का दर्जा : ये अब एससी
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : इस फैसले में भले ढेरों पेंच हों, मगर चुनावी ड्योढ़ी पर खड़ी उत्तर प्रदेश सरकार ने 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने का निर्णय लिया है। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। कैबिनेट ने 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में परिभाषित करके अनुमन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में यूं तो 74 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, लेकिन 17 अति पिछड़ी जातियों को एससी का दर्जा देने का फैसला महत्वपूर्ण है। इस निर्णय को लेकर भले तकनीकी पेंच तलाशे जा रहे हों, लेकिन समाजवादी सरकार ने इन जातियों की तकरीबन साढ़े 13 फीसद आबादी को पाले में करने का चुनावी दांव चल दिया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि ये 17 जातियां मूलरूप से केवल पांच जातियां हैं। इनका खानपान, रहन-सहन एक जैसा है। इनकी आर्थिक स्थिति भी दयनीय है। विधि विशेषज्ञों व महाधिवक्ता के अनुसार इन जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में परिभाषित करके व कार्मिक की अधिसूचना में एक बिंदु जोड़कर एससी को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधा दी जा सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद की अध्यक्षता में छह जुलाई, 2012 को पांच मंत्रियों की उपसमिति से 17 पिछड़ी जातियों पर रिपोर्ट मांगी थी। समिति ने फरवरी, 2013 में सरकार को सौंपी रिपोर्ट में कहा था कि इन 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में परिभाषित कर लिया जाए। साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा किये गए सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक अध्ययन की रिपोर्ट 18 बिंदुओं के साथ केंद्र सरकार को भेजी जाए। अखिलेश कैबिनेट ने 28 फरवरी, 2013 को संस्तुति पर अपनी मंजूरी देकर केंद्र सरकार को भेज दिया था। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रलय ने 22 जुलाई, 2015 को भेजे पत्र में इन जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में स्वीकार करने योग्य नहीं पाया था। अब अखिलेश यादव कैबिनेट ने इन जातियों को एससी के रूप में परिभाषित कर उसका लाभ देने का फैसला लिया है। राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में हुकुम सिंह की अध्यक्षता में गठित सामाजिक न्याय समिति के आंकड़े कहते हैं कि प्रदेश में केवट, मल्लाह, मछुआ, निषाद की आबादी 4.33 फीसद, कुम्हार, प्रजापति 3.24 फीसद, भर, राजभर 2.44 फीसद, कहार-कश्यप धीमर, बाथम, तुरहा, बिंद, गोड़िया की आबादी 3.31 फीसद के करीब है।
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