जागरण संवाददाता, रायबरेली : अगस्त में परिषदीय स्कूलों में सहायक अध्यापकों के पदों पर नियुक्ति पाने वाले 555 शिक्षकों के नियुक्ति पत्र बिना से किसी सूचना के जिले की सरकारी वेबसाइट (एनआइसी) से हटने का मामला गंभीर बनता जा रहा है। डिस्ट्रिक इनफार्मेशन अधिकारी (डीआइओ) व बीएसए ने सूची को एनआइसी से हटाने से इन्कार किया है। ऐसे में कहीं सरकारी वेबसाइड से कहीं ‘बाहरी’ लोग तो खिलवाड़ नहीं कर रहे है। 16,448 सहायक शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में रायबरेली जिले को 555 शिक्षकों को तैनाती मिली थी। इन शिक्षकों के नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद उन्हें एनआइसी की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया। जिससे भविष्य में नियुक्ति पाने वाले शिक्षक इस सूची के जरिए अपना ब्योरा ऑनलाइन देख सकते थे। लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में मानकों को ताक पर रखते हुए उन स्कूलों में शिक्षकों के संशोधन कर दिए गए, जहां छात्रों की संख्या कम थी और शिक्षक ज्यादा, जोकि पूरी तरह शिक्षा का अधिकार नियम से विपरीत है। ऐसे में अचानक से एनआइसी की वेबसाइड से 555 शिक्षकों के नियुक्ति पत्र हटाए जाने का मामला खुद में गंभीर प्रश्न बनता जा रहा है। लेकिन सैकड़ों की संख्या में हुए संशोधन कराने वाले शिक्षकों को सिर्फ फोटो कापियां थमायी गई और उसी आधार पर प्रधानाध्यापकों पर विभागीय दवाब बनाकर उन्हें ज्नाइन कर दिया गया। जबकि नियुक्ति के दौरान फोटो कॉपी पर ज्वाइनिंग पूरी तरह से गलत है। अब सरकारी वेबसाइड से नियुक्ति पत्र कैसे हटे इस बात से अंजान दिख रहे है।
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555 Teacher Bharti शिक्षकों के नियुक्ति पत्र : ..तो किसने वेबसाइट से हटाए नियुक्ति पत्र
08/12/2016
555 Teacher Bharti शिक्षकों के नियुक्ति पत्र : ..तो किसने वेबसाइट से हटाए नियुक्ति पत्र
जागरण संवाददाता, रायबरेली : अगस्त में परिषदीय स्कूलों में सहायक अध्यापकों के पदों पर नियुक्ति पाने वाले 555 शिक्षकों के नियुक्ति पत्र बिना से किसी सूचना के जिले की सरकारी वेबसाइट (एनआइसी) से हटने का मामला गंभीर बनता जा रहा है। डिस्ट्रिक इनफार्मेशन अधिकारी (डीआइओ) व बीएसए ने सूची को एनआइसी से हटाने से इन्कार किया है। ऐसे में कहीं सरकारी वेबसाइड से कहीं ‘बाहरी’ लोग तो खिलवाड़ नहीं कर रहे है। 16,448 सहायक शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में रायबरेली जिले को 555 शिक्षकों को तैनाती मिली थी। इन शिक्षकों के नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद उन्हें एनआइसी की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया। जिससे भविष्य में नियुक्ति पाने वाले शिक्षक इस सूची के जरिए अपना ब्योरा ऑनलाइन देख सकते थे। लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में मानकों को ताक पर रखते हुए उन स्कूलों में शिक्षकों के संशोधन कर दिए गए, जहां छात्रों की संख्या कम थी और शिक्षक ज्यादा, जोकि पूरी तरह शिक्षा का अधिकार नियम से विपरीत है। ऐसे में अचानक से एनआइसी की वेबसाइड से 555 शिक्षकों के नियुक्ति पत्र हटाए जाने का मामला खुद में गंभीर प्रश्न बनता जा रहा है। लेकिन सैकड़ों की संख्या में हुए संशोधन कराने वाले शिक्षकों को सिर्फ फोटो कापियां थमायी गई और उसी आधार पर प्रधानाध्यापकों पर विभागीय दवाब बनाकर उन्हें ज्नाइन कर दिया गया। जबकि नियुक्ति के दौरान फोटो कॉपी पर ज्वाइनिंग पूरी तरह से गलत है। अब सरकारी वेबसाइड से नियुक्ति पत्र कैसे हटे इस बात से अंजान दिख रहे है।
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