राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में विभिन्न विभागों में दोबारा नियुक्ति पर रखे गए प्रोफेसरों को हटाने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस संबंध में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की ओर से जारी अधिसूचना को रद कर दिया है। कोर्ट ने प्रोफेसरों को तब तक काम करने की छूट दी है जितने समय तक के लिए उन्हें नियुक्ति किया गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति अभय कुमार की खंडपीठ ने डॉ. राम किशोर शास्त्री व आठ अन्य की याचिका पर दिया है। याचियों का कहना था कि वे संस्कृत, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, हंिदूी, विधि, गणित, रसायन शास्त्र आदि विभागों में सुपर न्युएटेड प्रोफेसर हैं। यूजीसी द्वारा तय लाइन और एक्सपर्ट कमेटी की संस्तुति पर 10 मार्च, 2015 को उनकी दोबारा नियुक्ति की गई थी। कार्यकारिणी परिषद ने भी इसका अनुमोदन किया था। बाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने 65 साल से अधिक के प्रोफेसरों की सेवाएं समाप्त कर दी। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याचियों का कहना था कि जिन विभागों में उन्हें नियुक्त किया गया है, उनमें काफी पद रिक्त हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि इन प्रोफेसरों की विभागों में जरूरत है। कोर्ट ने प्रोफसरों से यह भी कहा है कि वे चाहें तो अपने वेतन के लिए कुलपति को प्रत्यावेदन दे सकते हैं

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