जासं, इलाहाबाद : रेलवे भर्ती बोर्ड की नान टेक्निकल पापुलर कटेगरी परीक्षा में भर्ती माफिया की नहीं चली। नकल के जरिए या परीक्षा में दूसरे को बैठाकर नौकरी दिलाने का ठेका लेने वाले हतोत्साहित हुए हैं। क्योंकि जिन सेंटरों पर नकल के मामले सामने आए थे, उन सेंटरों से दस फीसद से भी कम अभ्यर्थी पास हुए हैं। रेलवे भर्ती बोर्ड ने पहली बार आनलाइन परीक्षा आयोजित कराई तो कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसमें अनुमान से ज्यादा आवेदक आए तो छोटे-छोटे कंप्यूटर इंस्टीट्यूट को परीक्षा केंद्र बना दिया गया था। उनकी निगरानी करना रेलवे अफसरों के लिए मुश्किल हो रहा था। परीक्षा के दौरान अफरातफरी का माहौल था। पहली बार हो रही आनलाइन परीक्षा का फायदा उठाने के लिए भर्ती माफिया सक्रिय हुए। कई लोगों को भर्ती कराने का ठेका लेकर वह इलेक्ट्रानिक उपकरण के जरिए नकल करवा रहे थे। इसकी जानकारी आरआरबी के अफसरों को हुई तो रेलवे विजिलेंस और यूपी एसटीएफ को भी जांच के लिए लगा दिया गया। प्रदेश के तमाम परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी हुई। इस दौरान एसटीएफ ने 50 से अधिक लोग पकड़े। हाइटेक तरीके से नकल होने के कारण परीक्षा को लेकर कई सवाल खड़े होने लगे। ऐसे में परीक्षा होने के बाद इसका रिजल्ट निकालने में रेलवे ने करीब आठ महीने का समय लिया। कापियां चेक करने के साथ ही आरआरबी ने हर सेंटर की रिकार्ड गतिविधियों को देखा गया। उन सेंटरों पर विशेष फोकस रहा, जहां पर नकलची पकड़े गए। आरआरबी चेयरमैन ने बताया कि जिन सेंटरों पर नकलची पकड़े गए, उन सेंटरों का रिजल्ट बहुत खराब हुआ है। ऐसे सेंटरों से दस फीसद से भी कम अभ्यर्थी पाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि भर्ती माफिया को हतोत्साहित करने के लिए मेंस परीक्षा कराई जा रही है। मेंस परीक्षा हाई सिक्योरिटी में होगी। उस दौरान जो भी नकलची पकड़ा जाएगा, उसके खिलाफ मुकदमा कराया जाएगा।
नॉन टेक्निकल पापुलर कटेगरी की परीक्षा में नहीं चली भर्ती माफिया की

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