बदलते दौर में उप्र लोकसेवा आयोग में तमाम बदलाव हुए हैं, लेकिन आयोग प्रतियोगियों के मनमुताबिक नहीं बदल रहा है। यही वजह है कि प्रतियोगी आयोग के करीब आकर भी दूर हो रहे हैं। हालत यह है कि युवा नौकरी पाने के लिए आयोग की परीक्षाओं में आवेदन करते हैं, तय शुल्क भरते हैं, लेकिन ऐन वक्त पर वह परीक्षा देने नहीं जा पाते हैं। पिछले वर्षो को छोड़ दे तो इस साल की छह परीक्षाओं में 15 लाख युवाओं ने आवेदन किया, लेकिन महज सात लाख ही उपस्थित हुए। बड़ी संख्या में युवाओं के परीक्षा छोड़ने पर आयोग गंभीर ही नहीं है और न ही इस दिशा में वाजिब कदम उठाए जा रहे हैं। 1उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग में वर्षभर विविध प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन होता है। आयोग इसका बाकायदे कैलेंडर भी जारी करता है। छोटी-बड़ी (आवेदक
संख्या के हिसाब से) लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक परीक्षाएं व साक्षात्कार आदि होते हैं। इनमें इधर के वर्षो में युवाओं का आयोग से मोहभंग हो रहा है। वह नौकरी पाने के लिए दावेदारी तो करते हैं, लेकिन ऐन वक्त पर परीक्षा में शामिल नहीं होते। इसकी वजह यह है कि आयोग मनमाने तरीके से युवाओं का परीक्षा केंद्र सुदूर जिलों में भेज रहा है। दूर जिलों में केंद्र तय करने की प्रक्रिया इधर चार वर्षो में ही हुई है इसके पहले उम्दा व्यवस्था रही है। 1आयोग में वर्ष 2000 तक आवेदन करने वाले युवाओं से परीक्षा केंद्र का विकल्प मांगा जाता था और अधिकांश को मन मुताबिक परीक्षा केंद्र मिल जाता था। वर्ष 2001 से आयोग ने यह व्यवस्था की थी कि परीक्षार्थी जिस जिले का रहने वाला है उसी के आसपास परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाता रहा है, लेकिन वर्ष 2012 में आयोग अध्यक्ष अनिल कुमार यादव के समय में परीक्षा केंद्र सुदूर जिलों में भेजा जाने लगा। इसकी वजह परीक्षा की शुचिता बताई गई, आयोग का कहना था कि यह कदम परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए उठाया गया है। दूर के जिलों में केंद्र जाने के बाद से लगातार परीक्षार्थियों की संख्या घट रही है।

0 comments:
Post a Comment