27/07/2017

UPPCS जांच के दायरे में दो चरणों की परीक्षा के 10 हजार पद





इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददातासपा शासनकाल के दौरान उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से की गई दो चरणीय परीक्षा के तकरीबन 10 हजार पद जांच के दायरे में आएंगे। इन भर्तियों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं विचाराधीन हैं।राजस्व निरीक्षक, खाद्य सुरक्षा अधिकारी तथा अधीनस्थ कृषि सेवा वर्ग 3 के 7675 पद सहित सम्मिलित अवर अभियंता विशेष चयन 2008, सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा 2008, अवर अभियंता सामान्य चयन 2008, प्रोग्रामर श्रेणी 2 लोक सेवा आयोग 2010 के अतिरिक्त अन्य कई भर्तियों की भी जांच होगी।अधीनस्थ कृषि सहायक वर्ग 3 के कुल 6628 पदों में ओबीसी का पद शासन द्वारा 566 निर्धारित था। लेकिन आयोग ने सामान्य तथा अनुसूचित जाति के अधियाचित पदों में कटौती कर ओबीसी की सीट 2030 कर दिया था।हाईकोर्ट इस पूरे परिणाम को रद्द कर चुका है। मामला सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है। इसी प्रकार खाद्य सुरक्षा अधिकारी 2014 के 430 पदों की परीक्षा अनिल यादव ने बहुत जल्दबाजी में कराई थी। लेकिन अर्हता तथा आरक्षण नियमावली में छेड़छाड़ को लेकर मामला उच्च न्यायालय में लम्बित है। इस परीक्षा का दो बार परिणाम जारी हुआ है। राजस्व निरीक्षक 2014 सबसे विवादित परीक्षा रही। इसके 617 पदों पर चयन सभी नियम कानूनों को दरकिनार कर किया गया है, इसकी स्क्रीनिंग परीक्षा की उत्तर कुंजी तक जारी नहीं की गई तथा इतना बड़ा परिणाम बिना नाम के केवल अनुक्रमांक के आधार पर जारी हुआ। यह तीनों परीक्षा परिणाम कोर्ट में विचाराधीन हैं। अनुमानत: दो चरणीय परीक्षा में पदों की संख्या दस हजार से अधिक होगी।

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