26/07/2017

UPTET SHIKSHAMITRA शिक्षामित्रों को थोड़ी राहत, बड़ी आफत







मात्र 22 हजार शिक्षामित्र टीईटी उत्तीर्ण

प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक फिर बन गए शिक्षामित्र

दाखिल करेंगे पुन: विचार याचिका

नई भर्तियों में ऊंची मेरिट वाले अभ्यर्थियों से मुकाबला होगा कठिन, शिक्षक पात्रता परीक्षा दो बार में उत्तीर्ण करना सबके बस में नहीं

धर्मेश अवस्थी, इलाहाबाद1शिक्षामित्रों को शीर्ष कोर्ट से फौरी राहत जरूर मिली है, लेकिन उनकी आगे की राह बेहद कठिन है। कोर्ट ने सहायक शिक्षक बनने के मानकों से कोई समझौता न करने का निर्देश दिया है। यही उनकी परेशानी की सबसे बड़ी वजह बनेगा, क्योंकि अब शिक्षामित्रों को वह सब करना पड़ेगा, जो डीएलएड (पूर्व बीटीसी) अभ्यर्थी कर रहे हैं। अधिकांश शिक्षामित्र योग्यता के मानक पर ऐसे नहीं हैं, जिस तरह के अभ्यर्थी इन दिनों डीएलएड करके निकल रहे हैं। 1बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षामित्रों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया है। इसमें हाईकोर्ट की तरह शीर्ष कोर्ट ने भी शिक्षामित्रों का समायोजन सही नहीं माना है, लेकिन उन्हें कुछ शर्तो के साथ फिलहाल बरकरार रखा गया है। शीर्ष कोर्ट की ओर से जारी यह शर्ते भले ही अभी राहत पहुंचा रही हैं, लेकिन उन्हें पूरा कर पाना उतना आसान नहीं है। 1शीर्ष कोर्ट ने सभी शिक्षामित्रों को दो बार में टीईटी यानी अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने का निर्देश दिया है। यह इम्तिहान उत्तीर्ण करना सभी शिक्षामित्रों के लिए टेढ़ी खीर है, क्योंकि इधर लगातार टीईटी का रिजल्ट गिरता जा रहा है। 2016 में महज 11 फीसद अभ्यर्थी सफल हुए, 89 प्रतिशत अनुत्तीर्ण हो गए हैं। खास बात यह है कि इसमें बैठने वाले वह अभ्यर्थी हैं, जो डीएलएड की नियमित पढ़ाई कर रहे हैं, फिर भी वह परीक्षा की वैतरणी पार नहीं कर पा रहे हैं। इसके पहले 2015 में टीईटी का उत्तीर्ण प्रतिशत महज 17 फीसद रहा है। ज्ञात हो कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर अधिकांश शिक्षामित्रों ने दूरस्थ बीटीसी का प्रशिक्षण प्राप्त किया है, ताकि उनकी सेवाएं बरकरार रहें। 1शीर्ष कोर्ट का यह भी निर्देश है कि शिक्षामित्र टीईटी उत्तीर्ण करने के बाद शिक्षक पद की नई भर्तियों के लिए आवेदन करके योग्यता के आधार पर चयनित हों। 1यह शर्त पूरा करना अधिकांश शिक्षामित्रों के बस में नहीं है, क्योंकि तमाम शिक्षामित्र अपने गांव में अधिक योग्य होने के कारण नियुक्ति पाने में तो सफल हो गए, लेकिन जब डीएलएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों से उनका मुकाबला होगा तो शैक्षिक मेरिट में वह पीछे छूट सकते हैं। ज्ञात हो कि इधर डीएलएड के लिए चयनित ज्यादातर अभ्यर्थी ऊंची शैक्षिक मेरिट धारक हैं। 1शिक्षक बनने के लिए 2007, 2008 व 2010 के तमाम बीटीसी अभ्यर्थी अब भी जीतोड़ प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वह मेरिट में मात खाने की वजह से चयनित नहीं हो पा रहे हैं। यही मुश्किल शिक्षामित्रों के सामने भी आने के आसार हैं। शीर्ष कोर्ट ने फिलहाल दो मौके देकर शिक्षामित्रों को शिक्षक बनने की रेस में बने रहने का उम्दा अवसर जरूर मुहैया कराया है। 1प्रदेश सरकार पर टिका दारोमदार : शीर्ष कोर्ट ने शिक्षामित्रों को शिक्षक भर्ती में अनुभव का वेटेज देने का निर्देश दिया है। यह वेटेज प्रदेश सरकार के निर्देश पर मिलेगा। इसके लिए शिक्षामित्रों को सूबे की सरकार पर निर्भर रहना होगा। दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ मांग कर रहा है कि सरकार शिक्षामित्रों की विभागीय टीईटी कराए यह कार्य भी सरकार की मर्जी पर ही संभव है। जिस तरह से अखिलेश सरकार ने शिक्षामित्रों को दूरस्थ बीटीसी का लाभ दिया था।धर्मेश अवस्थी, इलाहाबाद1शिक्षामित्रों को शीर्ष कोर्ट से फौरी राहत जरूर मिली है, लेकिन उनकी आगे की राह बेहद कठिन है। कोर्ट ने सहायक शिक्षक बनने के मानकों से कोई समझौता न करने का निर्देश दिया है। यही उनकी परेशानी की सबसे बड़ी वजह बनेगा, क्योंकि अब शिक्षामित्रों को वह सब करना पड़ेगा, जो डीएलएड (पूर्व बीटीसी) अभ्यर्थी कर रहे हैं। अधिकांश शिक्षामित्र योग्यता के मानक पर ऐसे नहीं हैं, जिस तरह के अभ्यर्थी इन दिनों डीएलएड करके निकल रहे हैं। 1बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षामित्रों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया है। इसमें हाईकोर्ट की तरह शीर्ष कोर्ट ने भी शिक्षामित्रों का समायोजन सही नहीं माना है, लेकिन उन्हें कुछ शर्तो के साथ फिलहाल बरकरार रखा गया है। शीर्ष कोर्ट की ओर से जारी यह शर्ते भले ही अभी राहत पहुंचा रही हैं, लेकिन उन्हें पूरा कर पाना उतना आसान नहीं है। 1शीर्ष कोर्ट ने सभी शिक्षामित्रों को दो बार में टीईटी यानी अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने का निर्देश दिया है। यह इम्तिहान उत्तीर्ण करना सभी शिक्षामित्रों के लिए टेढ़ी खीर है, क्योंकि इधर लगातार टीईटी का रिजल्ट गिरता जा रहा है। 2016 में महज 11 फीसद अभ्यर्थी सफल हुए, 89 प्रतिशत अनुत्तीर्ण हो गए हैं। खास बात यह है कि इसमें बैठने वाले वह अभ्यर्थी हैं, जो डीएलएड की नियमित पढ़ाई कर रहे हैं, फिर भी वह परीक्षा की वैतरणी पार नहीं कर पा रहे हैं। इसके पहले 2015 में टीईटी का उत्तीर्ण प्रतिशत महज 17 फीसद रहा है। ज्ञात हो कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर अधिकांश शिक्षामित्रों ने दूरस्थ बीटीसी का प्रशिक्षण प्राप्त किया है, ताकि उनकी सेवाएं बरकरार रहें। 1शीर्ष कोर्ट का यह भी निर्देश है कि शिक्षामित्र टीईटी उत्तीर्ण करने के बाद शिक्षक पद की नई भर्तियों के लिए आवेदन करके योग्यता के आधार पर चयनित हों। 1यह शर्त पूरा करना अधिकांश शिक्षामित्रों के बस में नहीं है, क्योंकि तमाम शिक्षामित्र अपने गांव में अधिक योग्य होने के कारण नियुक्ति पाने में तो सफल हो गए, लेकिन जब डीएलएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों से उनका मुकाबला होगा तो शैक्षिक मेरिट में वह पीछे छूट सकते हैं। ज्ञात हो कि इधर डीएलएड के लिए चयनित ज्यादातर अभ्यर्थी ऊंची शैक्षिक मेरिट धारक हैं। 1शिक्षक बनने के लिए 2007, 2008 व 2010 के तमाम बीटीसी अभ्यर्थी अब भी जीतोड़ प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वह मेरिट में मात खाने की वजह से चयनित नहीं हो पा रहे हैं। यही मुश्किल शिक्षामित्रों के सामने भी आने के आसार हैं। शीर्ष कोर्ट ने फिलहाल दो मौके देकर शिक्षामित्रों को शिक्षक बनने की रेस में बने रहने का उम्दा अवसर जरूर मुहैया कराया है। 1प्रदेश सरकार पर टिका दारोमदार : शीर्ष कोर्ट ने शिक्षामित्रों को शिक्षक भर्ती में अनुभव का वेटेज देने का निर्देश दिया है। यह वेटेज प्रदेश सरकार के निर्देश पर मिलेगा। इसके लिए शिक्षामित्रों को सूबे की सरकार पर निर्भर रहना होगा। दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ मांग कर रहा है कि सरकार शिक्षामित्रों की विभागीय टीईटी कराए यह कार्य भी सरकार की मर्जी पर ही संभव है। जिस तरह से अखिलेश सरकार ने शिक्षामित्रों को दूरस्थ बीटीसी का लाभ दिया था।अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते शिक्षामित्र। (फाइल फोटो)परिषद के प्राथमिक स्कूलों में एक लाख 72 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। उनमें से एक लाख 37 हजार को सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किया गया था। इनमें से 22 हजार शिक्षामित्र ऐसे हैं जिन्होंने समय रहते टीईटी यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर लिया है। इससे वह फिलहाल सुरक्षित हैं, लेकिन समायोजन सही न होने की वजह से उन्हें नये सिरे से शिक्षक बनने के लिए आवेदन जरूर करना पड़ेगा। यह कार्य पूरा होने पर वह अधिकृत तौर पर सहायक अध्यापक हो जाएंगे।राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर समायोजित होने वाले अभ्यर्थी अब फिर शिक्षामित्र हो गए हैं। ऐसे में वह शिक्षकों का वेतन पाने के हकदार नहीं हैं और उनका तबादला भी नहीं हो सकेगा, बल्कि पहले की तरह उन्हें मानदेय से ही काम चलाना पड़ेगा। इसमें अब प्रदेश सरकार का रुख सबसे अहम होगा, वह जल्द ही शीर्ष कोर्ट के फैसले पर निर्णय लेगी, ताकि स्कूलों में पठन-पाठन की स्थिति बिगड़ने न पाए। सहायक अध्यापक पद पर समायोजित शिक्षकों का फिर से शिक्षामित्र बनने की वजह शीर्ष कोर्ट का समायोजन रद करना है। सभी एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों को नए सिरे से शिक्षक बनने की अर्हता पूरी करनी होगी, तब वह फिर शिक्षकों का वेतन आदि ले सकेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार यदि चाहे तो उन्हें शिक्षामित्र पद पर रख सकती है यानी अब सब सरकार की मर्जी पर टिका है। 132 हजार शिक्षामित्रों की दावेदारी खत्म : परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में तैनात एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों में से एक लाख 37 हजार को सहायक अध्यापक पद पर समायोजित कर दिया गया था, लेकिन 32 हजार शिक्षामित्र समायोजन की उम्मीद संजोए थे, लेकिन शीर्ष कोर्ट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अब वह समायोजन की मांग भले ही करें, लेकिन सरकार अब उन्हें सारी अर्हता पूरी करने पर ही समायोजित कर पाएगी। 1मानदेय बढ़ाने की मांग पकड़ेगी जोर : शिक्षामित्र इस समय प्रतिमाह 3500 रुपये मानदेय पा रहे हैं उनका मानदेय बढ़ाकर दस हजार रुपये प्रतिमाह करने का वादा प्रदेश सरकार ने कुछ माह पहले किया है, लेकिन पिछले दिनों जारी मानदेय में बढ़ोतरी नहीं हुई थी। ऐसे में मानदेय बढ़ोतरी करने का भी सरकार पर दबाव होगा। ज्ञात हो कि कुछ दिन ही पहले पिछले तीन माह का मानदेय पुरानी दरों पर जारी किया गया है। उसी समय शिक्षामित्रों ने नाखुशी जताई थी।उप्र दूरस्थ बीटीसी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार यादव ने कहा है कि शीर्ष कोर्ट का फैसला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ हार नहीं मानेगा। जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में पुन: विचार याचिका दाखिल की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस कठिन घड़ी में शिक्षामित्र धैर्य से काम लें, जिंदगी यही खत्म नहीं होती। संघ वरिष्ठ अधिवक्ताओं से विचार विमर्श कर रहा है। संविधान पीठ में सुनवाई अपील दाखिल होगी। वहीं, शिक्षामित्रों के दूसरे गुट आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन ने बुधवार से कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि सरकार सहानुभूति पूर्वक उन पर विचार नहीं करती तो कार्य बहिष्कार जारी रखेंगे। सरकार शिक्षामित्रों के लिए विशेष प्रावधान करे।

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