विधि संवाददाता, इलाहाबाद : माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र की परीक्षा में दो प्रश्नों के गलत जवाब का एक और मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) 2013 सामाजिक विज्ञान विषय की परीक्षा में दो प्रश्नों के गलत जवाब पर हाईकोर्ट ने चयन बोर्ड व प्रदेश सरकार से जवाब-तलब किया है। गलत जवाब का मामला कोर्ट में पहुंचने के बाद अदालत ने नियुक्तियां याचिका के निर्णय के अधीन कर ली हैं।
जोगेश्वर सिंह और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने यह आदेश दिया। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह ने बताया कि 720 सामाजिक विज्ञान के पदों पर नियुक्ति के लिए 28 दिसंबर 2013 को चयन बोर्ड ने विज्ञापन जारी किया था। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बाद अंतिम परिणाम 19 जून 2017 को जारी किया गया। परीक्षा में पूछे गए दो प्रश्नों के उत्तर को लेकर विवाद था। याचीगण ने इस पर अपनी आपत्ति भी दाखिल की, मगर बोर्ड ने कोई निर्णय नहीं लिया तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न पर कोर्ट भी इस पर सहमत थी कि इस प्रश्न के उत्तर में दिया गया आयोग का जवाब सही नहीं है।परीक्षा में पूछा गया था कि वोट देने का अधिकार किस प्रकार का अधिकार है। इसके उत्तर में विकल्प दिया गया था कि (अ) सामाजिक अधिकार, (ब) व्यक्तिगत अधिकार, (स) संवैधानिक अधिकार और (द) विधिक अधिकार है। याची ने अपने जवाब में विधिक अधिकार को ही सही किया, मगर आयोग की ओर से जारी आंसर शीट में सही जवाब संवैधानिक अधिकार दिया गया है। याची का चयन दो अंकों से रुक गया है, जबकि एक प्रश्न 3.4 अंक का है। यदि उसे सही अंक मिल जाते तो वह चयनित हो सकता है। गलत उत्तर को सही मानने से पूरा परिणाम खराब हो सकता है। कोर्ट ने याचिका में पक्षकार बनाए गए सात चयनित अभ्यर्थियों को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। याचिका पर 18 सितंबर को अगली सुनवाई होगी।
’>>माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और प्रदेश सरकार को दिया नोटिस
>>परीक्षा में सात चयनित अभ्यर्थियों को भी नोटिस, 18 सितंबर को सुनवाई1
जोगेश्वर सिंह और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने यह आदेश दिया। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह ने बताया कि 720 सामाजिक विज्ञान के पदों पर नियुक्ति के लिए 28 दिसंबर 2013 को चयन बोर्ड ने विज्ञापन जारी किया था। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बाद अंतिम परिणाम 19 जून 2017 को जारी किया गया। परीक्षा में पूछे गए दो प्रश्नों के उत्तर को लेकर विवाद था। याचीगण ने इस पर अपनी आपत्ति भी दाखिल की, मगर बोर्ड ने कोई निर्णय नहीं लिया तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न पर कोर्ट भी इस पर सहमत थी कि इस प्रश्न के उत्तर में दिया गया आयोग का जवाब सही नहीं है।परीक्षा में पूछा गया था कि वोट देने का अधिकार किस प्रकार का अधिकार है। इसके उत्तर में विकल्प दिया गया था कि (अ) सामाजिक अधिकार, (ब) व्यक्तिगत अधिकार, (स) संवैधानिक अधिकार और (द) विधिक अधिकार है। याची ने अपने जवाब में विधिक अधिकार को ही सही किया, मगर आयोग की ओर से जारी आंसर शीट में सही जवाब संवैधानिक अधिकार दिया गया है। याची का चयन दो अंकों से रुक गया है, जबकि एक प्रश्न 3.4 अंक का है। यदि उसे सही अंक मिल जाते तो वह चयनित हो सकता है। गलत उत्तर को सही मानने से पूरा परिणाम खराब हो सकता है। कोर्ट ने याचिका में पक्षकार बनाए गए सात चयनित अभ्यर्थियों को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। याचिका पर 18 सितंबर को अगली सुनवाई होगी।
’>>माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और प्रदेश सरकार को दिया नोटिस
>>परीक्षा में सात चयनित अभ्यर्थियों को भी नोटिस, 18 सितंबर को सुनवाई1

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