
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के लगातार आदेशों के बावजूद नहीं सुधर रही हालत
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सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की लगातार फटकार के बाद भी यूपी के स्कूलों की हालत नहीं सुधरी। पिछले महीने लड़कियों के स्कूलों में टॉइलट की व्यवस्था दुरुस्त करने के आदेश हाई कोर्ट ने भी दिए थे। कोर्ट के अलावा निजी संस्थाएं भी सर्वे करती रही हैं, जिनमें बेहद खराब हालत बताई गई है। स्कूलों की हालत पर अध्ययन करने वाली संस्था 'असर' के एक सर्वे के मुताबिक 45 प्रतिशत स्कूल ऐसे हैं जहां टॉइलट का इस्तेमाल नहीं हो रहा। पीने की पानी, बाउंड्री वॉल के मामले में भी स्कूलों की हालत बदतर है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है और चीफ सेक्रेटरी को चार हफ्ते में हलफनामा यूपी के 45% स्कूलों में टॉइलट ही नहीं दाखिल करने को कहा है। एक एनजीओ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तीन सदस्यीय कमिटी बनाकर खुद स्कूलों की हालत पर रिपोर्ट मांगी थी। इस रिपोर्ट के बाद हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार पर सख्त टिप्पणी की है। असर की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 64 प्रतिशत स्कूलों में बाउंड्री तक नहीं है। वहीं 15 प्रतिशत स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। कुल 4.2 प्रतिशत स्कूल तो ऐसे हैं, जहां शौचालय बने ही नहीं हैं। वहीं 40.9 प्रतिशत स्कूलों में शौचालय हैं लेकिन उनका उपयोग नहीं हो रहा। लड़कियों के टॉयलेट की हालत भी चिंताजनक है। 12.3 प्रतिशत स्कूल तो ऐसे हैं जहां लड़कियों के लिए अलग से टॉयलेट ही नहीं हैं। 18.6 प्रतिशत स्कूलों में लड़कियों के टॉयलेट में ताला पड़ा है। वहीं 20 प्रतिशत लड़कियों के स्कूलों ऐसे हैं जहां टॉइलट उपयोग करने लायक नहीं हैं। इस तरह 50 प्रतशित लड़कियों के स्कलों में ही टॉइलट का उपयोग हो रहा है। 64 प्रतिशत स्कूलों में बाउंड्री नहीं पिछले महीने इलाहाबाद के एक स्कूल में टॉइलट का मुकदमा हाई कोर्ट पहुंचा था। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को सख्त आदेश दिए थे। प्रदेश सरकार ने केंद्र के मानक और सर्व शिक्षा अभियान के बजट की बात की तो कोर्ट ने कहा था कि प्रदेश सरकार की भी जिम्मेदारी है। क्या वह अपने संसाधन से टॉइलट नहीं बनवा सकती। खास तौर से लड़कियों के स्कूल में तो व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए प्रस्ताव प्रदेश सरकार से मांगा था। |
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