08/12/2016

Primary Teacher माध्यमिक शिक्षा विभाग में प्रभारी अफसरों को हटाने का प्रस्ताव : युक्त शिक्षा निदेशक पद के लिए दो साल से नहीं हुई डीपीसी

असली अफसर यहां तैनात


माध्यमिक शिक्षा विभाग के नियमित संयुक्त शिक्षा निदेशकों को मंडल मुख्यालयों पर तैनाती का मौका नहीं मिला है। इन ‘असली’ अफसरों को इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन स्टडीज इलाहाबाद, सीटी कॉलेज, शिविर कार्यालय लखनऊ, शिक्षा निदेशालय और सीमैट जैसे कार्यालयों में नियुक्ति दी गई है।


राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : माध्यमिक शिक्षा विभाग में उल्टी गंगा बह रही है। संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) के मलाईदार पदों पर कनिष्ठ अफसरों को तैनात किया गया है, वहीं वरिष्ठ अफसर शिक्षा निदेशालय आदि जगहों पर पदोन्नति की राह देख रहे हैं। शासन ने दो साल में इस कैडर के लिए एक भी प्रमोशन नहीं किया, जबकि पद खाली चल रहे हैं। शिक्षा निदेशालय से दो माह पहले प्रस्ताव भी भेजा गया है, वह भी शासन में अटका है। माध्यमिक शिक्षा विभाग में इन दिनों पदोन्नति एवं नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज है। राजकीय कालेजों में प्रमोशन के लिए शिक्षकों की रिपोर्ट मांगी गई है, वहीं इन कालेजों में एलटी ग्रेड शिक्षकों की तैनाती भी होने जा रही है। इसके उलट विभाग के अहम पदों पर ‘अपनों’ को बनाए रखने के लिए नियमों की अनदेखी हो रही है। प्रदेश के मंडल मुख्यालयों एवं अन्य जगहों पर संयुक्त शिक्षा निदेशकों की तैनाती होती है। इसके कुल 21 पद हैं। उनमें से आठ पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। इधर दो साल से शासन ने इस पद के लिए कोई प्रमोशन भी नहीं किया है, जबकि इसके नीचे के पदों को भरने में सब गंभीर हैं। नियमों की अनदेखी व तैनाती में मनमानी के मामले में जेडी का पद अपने आप में मिसाल है। विभाग में 13 नियमित संयुक्त शिक्षा निदेशक हैं, उनमें से केवल दो मीरजापुर मंडल में माया निरंजन एवं मेरठ मंडल में इंद्रदेव की तैनाती की गई है, बाकी सभी 11 जेडी महत्वहीन पदों पर यहां-वहां रखे गए हैं। सूबे के मेरठ व मिर्जापुर को छोड़कर सभी 16 मंडल मुख्यालयों पर ‘बड़ों’ के कृपापात्र कनिष्ठ अफसरों को तैनात कर दिया गया है। प्रभारी जेडी बने कई अधिकारी तो ऐसे भी हैं, जिन्हें उप शिक्षा निदेशक के पद पर कुछ माह पहले ही प्रमोशन मिला है। अपनी पहुंच के दम पर उन्होंने उससे भी बड़ा ओहदा हथिया लिया है। यह सब इसलिए संभव हुआ है, क्योंकि विभागीय बड़े अफसरों का इनसे ‘हित’ साधा जा रहा है। कुछ कनिष्ठ अफसरों के संपर्क तो इतने बड़े हैं कि उनके पास दो-दो मंडलों का प्रभार है। शासन को अब संयुक्त शिक्षा निदेशकों की सुधि आई है। शिक्षा निदेशालय से इस संबंध में प्रस्ताव भी मांगा गया तो वर्षो से हासिए पर पड़े अफसरों की उम्मीदें जगी थी, लेकिन दो माह से प्रमोशन प्रस्ताव शासन में अटका है। अफसर अब शिक्षकों के प्रमोशन की ओर मुखातिब हैं। माध्यमिक शिक्षा के अपर निदेशक रमेश कहते हैं कि शासन ने जेडी के लिए प्रस्ताव मांगा था, वह भेजा जा चुका है। अब आगे की कार्यवाई शासन ही तय करेगा।


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