राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश सरकार पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा बढ़ाने के लिए अब विशेषज्ञ डॉक्टरों की सीधी भर्ती करेगी। इस पर उच्च स्तरीय सहमति बन चुकी है। इससे साढ़े छह हजार विशेषज्ञ डॉक्टरों की सीधी भर्ती की रास्ता खुल जाएगा। पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र) से लेकर जिला व मंडलीय अस्पतालों को चलाने के लिए 16500 डॉक्टरों की आवश्यकता है। मगर इस समय सिर्फदस हजार डॉक्टर कार्यरत हैं जिनमें से 3500 डॉक्टर ही विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ हैं, जबकि मरीजों की संख्या व बीमारियों का प्रतिशत देखते हुए दस हजार विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत है। मौजूदा समय में सरकारी चिकित्सालयों के डॉक्टरों (पीएमएस संवर्ग) की भर्ती लोक सेवा आयोग के जरिये होती है। इसमें अधिक समय लगने के चलते रोगियों को सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा का लाभ नहीं मिल पाता। हालांकि विशेष परिस्थितियों में संविदा पर भर्तियां होती हैं, जिन्हें सिर्फ साक्षात्कार के जरिये नियुक्त किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने संविदा पर नियुक्ति को आधार बनाकर एमडी-एमएस के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत डॉक्टरों की साक्षात्कार के जरिये पूर्णकालिक भर्ती का प्रस्ताव शासन को भेजा था। वित्त, चिकित्सा शिक्षा व कार्मिक विभागों के अधिकारियों ने इस पर सहमति जताई थी। अब मुख्य सचिव राहुल भटनागर, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरुण सिन्हा व चिकित्सा शिक्षा विभाग की संयुक्त बैठक में सीधी भर्ती के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। अब इस पर कैबिनेट की मुहर लगते ही भर्ती की जा सकेगी।
बदलेगी सेवा नियमावली : सीधी भर्ती में वरिष्ठता व नियुक्ति संबंधी विवाद की आशंका के मद्देनजर पीएमएस संवर्ग की सेवा नियमावली में बदलाव किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने कार्मिक विभाग से राय मांगी है जिसमें लोकसेवा आयोग के माध्यम से भर्ती बंद करने का विकल्प भी दिया गया है। उच्च व सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का अध्ययन करने की बात कही गयी है।

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