02/12/2016

UP SI BHARTI 4010 पदों पर दारोगा भर्ती में 58 अभ्यर्थी बाहर


विधि संवाददाता, इलाहाबाद : 4010 पदों पर सब इंस्पेक्टर और प्लाटून कमांडेंट भर्ती के मामले में गलत तरीके से क्षैतिज आरक्षण लागू करने पर पुलिस विभाग ने कोर्ट के आदेश पर संशोधित याचिका दाखिल कर दी है। बुधवार को पुलिस विभाग ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए संशोधित परिणाम अदालत के समक्ष दाखिल किया। नए परिणाम में 64 ऐसे अभ्यर्थियों को स्थान मिला, जो गलत आरक्षण के कारण पूर्व में चयनित नहीं हो सके थे जबकि पहले से चयनित 58 अभ्यर्थी चयन सूची से बाहर हो गए।याची आशीष कुमार पांडेय की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग ने यह जानकारी दी। न्यायमूर्ति पंकज नकवी ने इसकी सुनवाई की। प्रकरण के अनुसार दारोगा भर्ती के 25 जून 2016 को घोषित परिणाम में 183 महिलाओं को गलत तरीके से क्षैतिज आरक्षण देते हुए सामान्य वर्ग की सीटों पर चयनित कर लिया गया। इसके खिलाफ याचिका दाखिल हुई जिस पर कोर्ट ने क्षैतिज आरक्षण सामान्य सीटों के बजाए अभ्यर्थियों की श्रेणी के भीतर ही करने का आदेश दिया। इस आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई थी।


मुकदमों में जवाब दाखिल करने का मैकेनिज्म बनाए पुलिस


हाईकोर्ट ने प्रदेश के पुलिस महकमे से कहा है कि वह अदालत में लंबित मुकदमों में समय से जवाब दाखिल करवाना सुनिश्चित करें। विभाग में ऐसा सिस्टम विकसित किया जाए कि सुनवाई से पूर्व जवाब आ जाए। इसके लिए बार-बार समय न मांगना पड़े। समय पर जवाब नहीं दाखिल करने से मुकदमे अनावश्यक रूप से लंबित रहते हैं और अदालत का समय बर्बाद होता है।1बांदा की एक छेड़खानी पीड़ित लड़की की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति आरएन कक्कड़ की पीठ ने डीजीपी जावीद अहमद को तलब किया था। डीजीपी ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि भविष्य में वह ऐसा इंतजाम करेंगे कि मुकदमों में समय से जवाब दाखिल हो जाए। प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता इमरान उल्लाह और एजीए विकास सहाय ने पक्ष रखा।प्रकरण के अनुसार बांदा की एक युवती ने कोतवाली थाने में तीनों लोगों के खिलाफ छेड़खानी की नामजद शिकायत की थी। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच की तथा तीनों अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि पुलिस ने अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं की है। कोर्ट ने सरकारी पक्ष को इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था, मगर कोई जवाब नहीं दिया गया। इस अदालत ने डीजीपी को तलब कर लिया। डीजीपी ने बताया कि मुकदमे में जो धाराएं लगाई गई हैं, उनमें सात वर्ष से कम सजा का प्रावधान है जिसमें गिरफ्तारी जरूरी नहीं है।

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