13/01/2017

17 जातियों को एससी में परिभाषित करने को चुनौती , हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से एक माह में मांगा जवाब


विधि संवाददाता, इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की पिछड़े वर्ग की अति पिछड़ी 17 जातियों को अनुसूचित जाति में परिभाषित कर सुविधाएं देने की अधिसूचना की वैधता के खिलाफ पर राज्य सरकार से एक माह में जवाब मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई नौ फरवरी को होगी। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले तथा न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने राजकुमार की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने फिलहाल अधिसूचना के अमल पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। याची का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत किसी जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने का अधिकार केंद्र सरकार को है। राज्य सरकार को ऐसा अधिकार नहीं है। इसलिए राज्य सरकार के शासनादेश 22 दिसंबर 2016 व 31 दिसंबर 2016 की अधिसूचना को रद किया जाय तथा 17 जातियों को पिछड़े वर्ग में वापस किया जाय। इस अधिसूचना से 17 जातियों को अनुसूचित जाति की सुविधाएं पाने का अधिकार दे दिया गया है। याची का कहना है कि यह अधिकार राज्य सरकार को अधिकार नहीं है। सरकार ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अधिसूचना जारी की है जिसे रद किया जाय।


अधिसूचना के अमल पर रोक लगाने से इन्कार, नौ फरवरी को सुनवाई


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