09/01/2017

UP Board : अफसर नहीं उठा रहे हेराफेरी से पर्दा


यूपी बोर्ड के इलाहाबाद क्षेत्रीय कार्यालय के अभिलेखों की हेराफेरी से पर्दा उठने का नाम ही नहीं ले रहा है। गोपनीय रिकॉर्डो में बदलाव का रहस्योद्घाटन हुए तीन माह बीत रहे हैं और जांच भी पूरी हो चुकी है, लेकिन रिपोर्ट को लेकर उहापोह कायम है। माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड के इलाहाबाद क्षेत्रीय कार्यालय में कई कॉलेजों के करीब दो सौ परीक्षार्थियों के हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के रिकॉर्ड बदल दिए गए हैं। शिक्षक बनने जा रहे एक युवक की शिकायत पर इस प्रकरण का बीते सितंबर व अक्टूबर माह में रहस्योद्घाटन हुआ। छानबीन करने पर वह तस्वीर सामने आई जिस पर ऐतबार करना मुश्किल है। क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव प्रमोद कुमार ने खुद ही इस पूरे मामले के सारे तार खंगाल डाले और वह संदिग्धों के करीब तक पहुंच गए थे, लेकिन पकड़े जाने की आशंका पर वह भाग खड़े हुए। इस खेल में एक डुप्लीकेट अंकपत्र क्षेत्रीय कार्यालय से जारी हुआ। उसे हासिल करने वाले जालसाज ने अपना आइडी तक लगाया है। इसीलिए उनकी पहचान हो पाई। कर्मचारियों पर शिकंजा कसते ही जालसाज रफूचक्कर हो गए। फर्जी अंक व प्रमाणपत्र का प्रयोग एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती में हुआ था, वहां के अफसरों ने उन्हें बुलवाने का प्रयास किया, लेकिन कोई नहीं आया। बाद में उन्हें बर्खास्त करके एफआइआर करने की खानापूरी करानी पड़ी। यह प्रकरण उजागर होने पर परिषद सचिव शैल यादव ने तीन अफसरों की जांच टीम गठित की और एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन तीन माह बाद भी कुछ नहीं हो सका है। ताज्जुब यह है कि क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव ने तो दोषी कर्मचारियों तक को चिन्हित कर लिया था। उन पर कार्रवाई की बारी आई तो वरिष्ठ अधिकारी ने यह निर्देश दिया कि अभिलेख कब बदले गए इसकी जांच हो, तब से जांच पूरी होने का नाम ही नहीं ले रही है।


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