27/07/2017

शिक्षा की गुणवत्ता के आगे हार गईं सारी दलीलें





इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददातागुणवत्तापूर्ण शिक्षा की अनिवार्यता के आगे मानवीय आधार पर शिक्षामित्रों को राहत की दलीलें हार गईं। नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के तहत 6 से 14 साल के बच्चों के योग्य शिक्षकों से शिक्षा दिलाने के अधिकार को सुप्रीम कोर्ट ने 1.72 लाख शिक्षामित्रों के गैरकानूनी समायोजन से अधिक महत्व दिया है।सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि फौरी तौर पर भले ही बच्चों को अयोग्य शिक्षकों से पढ़वा लिया जाए लेकिन अंतत: योग्य शिक्षकों की नियुक्ति करनी ही पड़ेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के 12 सितंबर 2015 के आदेश पर मुहर लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने जो न्यूनतम योग्यता निर्धारित की है उससे समझौता नहीं किया जा सकता।सुप्रीम कोर्ट में शिक्षामित्रों ने अध्यापन अनुभव, मानवीय आधार आदि दलील देते हुए राहत की गुहार लगाई थी। इससे पहले टीईटी की अनिवार्यता पर हाईकोर्ट की वृहदपीठ ने 31 मई 2013 के आदेश में भी शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी को हर हाल में जरूरी माना था। एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना की गलत व्याख्या के बाद उत्पन्न विषम स्थिति को वृहदपीठ ने स्पष्ट करते हुए यह आदेश दिया था। दरअसल 16 जनवरी 2013 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में टीईटी की अनिवार्यता को खारिज कर दिया था।डिवीजन बेंच ने 50 फीसदी अंकों के साथ स्नातक और बीएड डिग्रीधारकों को बिना टीईटी पास किए ही शिक्षक भर्ती में मौका देने को कहा था। इसके बाद टीईटी की अनिवार्यता पर वृहदपीठ का गठन हुआ था। संस्कृत के श्लोक ‘गुरु ब्रम्हा गुरु विष्णु..’ के माध्यम से गुरु महिमा का बखान करते हुए हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विन्स्टन चर्चिल के उस ऐतिहासिक वक्तव्य का भी जिक्र किया था जिसमें विन्स्टन चर्चिल ने कहा था-‘एक प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर के पास इतनी शक्ति होती है जितनी कि प्रधानमंत्री के पास भी कभी नहीं होती।’

शिक्षा की गुणवत्ता के आगे हार गईं सारी दलीलें Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Sarkari Result

1 comments:

  1. Mujhe bina yogyta ke naukari do nahi to aatmhatya kar lunga...vah re shikshamitra unki or dekho jo tumse jyada yogya hain aur 10000 bhi nahi pa rahe kam se kam tum itna to pa rahe ho ki tumhara kharch chal jaye jab tum 3500 pate the to kya chori karte the ghar chalane ke liye jo aaj 10000 me bhi nahi chala pa rahe ho

    ReplyDelete