29/07/2017

UPTET SHIKSHAMITRA UPTET SHIKSHAMITRA शिक्षामित्रों को मूल विद्यालयों में भेजने की तैयारी







UPTET SHIKSHAMITRA UPTET SHIKSHAMITRA शिक्षामित्रों को मूल विद्यालयों में भेजने की तैयारी Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Sarkari Result

8 comments:

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  2. Take strict action against them. No one have right to break law..no need to show sympathy if they destroying fututre of poor children......

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    1. Who zz destroying nd who cn destroy d FUTURE of children everyone can see...firstly i request you to learn the right spelling of FUTURE..😊

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  3. Brother u r absolutely right

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  4. रानू भैया का इस विपरीत परिस्थिति में सहयोग के लिये बहुत बहुत धन्यबाद।

    साथियो से निवेदन है कि ज्यादा से ज्यादा शेयर करे!

    लगातार कई काबिल लोगों की शिक्षामित्रों के बारे में, उनका समर्थन करने के बजाय नकारात्मक बातें की जा रही हैं...। मैं उनको उनकी काबिलियत पर शक न करते हुए वास्तविकता के धरातल पर ले जाना चाहता हूं......
    1. सन 2000 से पहले शिक्षक बनने हेतु qualification intermediate ही थी, उसी आधार पर इनको शिक्षा विभाग में लेकर, ग्राम पंचायत और न्याय पंचायत पर सबसे योग्य अभ्यर्थी को मेरिट द्वारा चयनित करके शिक्षा विभाग को संजीवनी देने का काम इन शिक्षामित्रों द्वारा किया गया।
    2. उस समय के हिसाब से ये योग्य थे, मानदेय केवल 2250 रुपये।
    3. 1998 से पहले जो शिक्षक नियुक्त हुये थे वो highschool पास ही थे।
    4. आज जिस B. Ed. की डिग्री का राग अलाप कर शिक्षामित्रों को अयोग्य बताया जा रहा है, वह हायर एजुकेशन के लिए एवं TGT की परीक्षा में शामिल होने के लिए थी।
    5. शिक्षामित्रों को लगाने के बाद भी जब शिक्षकों की भारी कमी से विभाग जूझा तो B. Ed. योग्यताधारी अभ्यर्थियों को बेसिक शिक्षा विभाग में समायोजित किया गया।
    5. यदि शिक्षामित्र गलत तो बेसिक में B.Ed. भी गलत।
    6. आज शिक्षामित्र यदि समायोजित किये गए तो उनको RTE के तहत ज़रूरी BTC प्रशिक्षण ग्रेजुएशन कराने के बाद ही ऐसा किया गया।
    7. यदि इनको TET ज़रूरी है तो इस पर तत्कालीन सरकारी मशीनरी को ठोस नियमावली बनानी चाहिए थी।
    8. तय करिये दोष सरकार का है या शिक्षामित्रों का।
    9. यदि इनकी नियुक्ति की तिथि को आधार नही बनाया गया है तो, TET को 2013 से लागू न करके सन 2000 के बाद जो भी शिक्षा विभाग की नियुक्तियां हैं...सब पर लागू किया जाना चाहिए....सबकी काबिलियत का अंदाज़ा लग जायेगा।
    10. इनकी नियुक्तियों से पहले highschool एवं intermediate का रिजल्ट 20% रहता था....जबकि आज 100%.....ऐसे में उस समय अपने गांव या न्याय पंचायत के सबसे काबिल अभ्यर्थी की योग्यता पर शक करना गलत है।
    11. शिक्षामित्रों ने कभी ये नहीं कहा कि B. Ed. को विभाग में मत लो, जबकि ये डिग्री higher education के लिए है....लेकिन बी.एड. वाले शिक्षामित्रों को अपना शत्रु मानते हैं।
    12. आपके हिसाब से तो केवल बी.एड. ही बेसिक में लगने चाहिए तो डी.एल.एड. और बी.एल.एड. के courses का भी विरोध दर्ज कराइये।
    13. 2011 TET की मार्कशीट एक एक लाख रुपये में बिकी, सफेदा गैंग का पर्दाफाश हुआ, TET conduct कराने वाला जेल में.....बात करते हो काबिलियत की।
    14. विगत TET का रिजल्ट 20% तक पहुंचना मुश्किल हो गया.....काबिलियत कहाँ घुस गई....।
    15. अपने जीवन के कीमती 17 साल इस प्रतिबंध के साथ विभाग को दिए कि इस दौरान कोई और काम या कहीं और नौकरी नहीं करेंगे।
    16. 2009 के बाद शिक्षामित्रों की कोई नई नियुक्ति नहीं की गई...आज एकदम से इनको हटाना कहाँ उचित है।
    17. बी.एड. योग्यताधारी इतने योग्य हैं तो TGT क्यों नहीं निकाल पाते, शिक्षामित्रों का TET निकालने का प्रतिशत TGT निकालने के प्रतिशत से ज्यादा है।
    18. 3500 में योग्य थे 30000 में अयोग्य हो गए।
    19. यदि शिक्षामित्रों को न लगाया जाता तो बेसिक शिक्षा का निजीकरण हो गया होता और आज आप बोलने लायक नहीं होते.........।
    उपरोक्त बातें कहने का मतलब केवल इतना है कि परस्पर वैमनस्य पैदा न करके....इस विपरीत परिस्थिति में इनका सहयोग करिये।
    ये मेरी निजी राय है..

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  5. रानू भैया का इस विपरीत परिस्थिति में सहयोग के लिये बहुत बहुत धन्यबाद।

    साथियो से निवेदन है कि ज्यादा से ज्यादा शेयर करे!

    लगातार कई काबिल लोगों की शिक्षामित्रों के बारे में, उनका समर्थन करने के बजाय नकारात्मक बातें की जा रही हैं...। मैं उनको उनकी काबिलियत पर शक न करते हुए वास्तविकता के धरातल पर ले जाना चाहता हूं......
    1. सन 2000 से पहले शिक्षक बनने हेतु qualification intermediate ही थी, उसी आधार पर इनको शिक्षा विभाग में लेकर, ग्राम पंचायत और न्याय पंचायत पर सबसे योग्य अभ्यर्थी को मेरिट द्वारा चयनित करके शिक्षा विभाग को संजीवनी देने का काम इन शिक्षामित्रों द्वारा किया गया।
    2. उस समय के हिसाब से ये योग्य थे, मानदेय केवल 2250 रुपये।
    3. 1998 से पहले जो शिक्षक नियुक्त हुये थे वो highschool पास ही थे।
    4. आज जिस B. Ed. की डिग्री का राग अलाप कर शिक्षामित्रों को अयोग्य बताया जा रहा है, वह हायर एजुकेशन के लिए एवं TGT की परीक्षा में शामिल होने के लिए थी।
    5. शिक्षामित्रों को लगाने के बाद भी जब शिक्षकों की भारी कमी से विभाग जूझा तो B. Ed. योग्यताधारी अभ्यर्थियों को बेसिक शिक्षा विभाग में समायोजित किया गया।
    5. यदि शिक्षामित्र गलत तो बेसिक में B.Ed. भी गलत।
    6. आज शिक्षामित्र यदि समायोजित किये गए तो उनको RTE के तहत ज़रूरी BTC प्रशिक्षण ग्रेजुएशन कराने के बाद ही ऐसा किया गया।
    7. यदि इनको TET ज़रूरी है तो इस पर तत्कालीन सरकारी मशीनरी को ठोस नियमावली बनानी चाहिए थी।
    8. तय करिये दोष सरकार का है या शिक्षामित्रों का।
    9. यदि इनकी नियुक्ति की तिथि को आधार नही बनाया गया है तो, TET को 2013 से लागू न करके सन 2000 के बाद जो भी शिक्षा विभाग की नियुक्तियां हैं...सब पर लागू किया जाना चाहिए....सबकी काबिलियत का अंदाज़ा लग जायेगा।
    10. इनकी नियुक्तियों से पहले highschool एवं intermediate का रिजल्ट 20% रहता था....जबकि आज 100%.....ऐसे में उस समय अपने गांव या न्याय पंचायत के सबसे काबिल अभ्यर्थी की योग्यता पर शक करना गलत है।
    11. शिक्षामित्रों ने कभी ये नहीं कहा कि B. Ed. को विभाग में मत लो, जबकि ये डिग्री higher education के लिए है....लेकिन बी.एड. वाले शिक्षामित्रों को अपना शत्रु मानते हैं।
    12. आपके हिसाब से तो केवल बी.एड. ही बेसिक में लगने चाहिए तो डी.एल.एड. और बी.एल.एड. के courses का भी विरोध दर्ज कराइये।
    13. 2011 TET की मार्कशीट एक एक लाख रुपये में बिकी, सफेदा गैंग का पर्दाफाश हुआ, TET conduct कराने वाला जेल में.....बात करते हो काबिलियत की।
    14. विगत TET का रिजल्ट 20% तक पहुंचना मुश्किल हो गया.....काबिलियत कहाँ घुस गई....।
    15. अपने जीवन के कीमती 17 साल इस प्रतिबंध के साथ विभाग को दिए कि इस दौरान कोई और काम या कहीं और नौकरी नहीं करेंगे।
    16. 2009 के बाद शिक्षामित्रों की कोई नई नियुक्ति नहीं की गई...आज एकदम से इनको हटाना कहाँ उचित है।
    17. बी.एड. योग्यताधारी इतने योग्य हैं तो TGT क्यों नहीं निकाल पाते, शिक्षामित्रों का TET निकालने का प्रतिशत TGT निकालने के प्रतिशत से ज्यादा है।
    18. 3500 में योग्य थे 30000 में अयोग्य हो गए।
    19. यदि शिक्षामित्रों को न लगाया जाता तो बेसिक शिक्षा का निजीकरण हो गया होता और आज आप बोलने लायक नहीं होते.........।
    उपरोक्त बातें कहने का मतलब केवल इतना है कि परस्पर वैमनस्य पैदा न करके....इस विपरीत परिस्थिति में इनका सहयोग करिये।
    ये मेरी निजी राय है..

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  6. To WO us time koi teacher ki post nahi thi Jo inhe de gaye the WO sirf siksha mitra ke post pe rakkhe gaye the n ki teacher ke post pe

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  7. WO itne eligible nahi the or n hi hai Jo new generation ko teach kar sake yahi hakekat hai,Kara socho ki itne time apko lotry ke roop me teacher ke salary mil gaye to kya aap uske yogya ho gaye ho

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