विधि संवाददाता, इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीसीएसजे प्रारंभिक परीक्षा में सवालों के गलत उत्तर विकल्प को लेकर दाखिल याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने लोक सेवा आयोग के फामरूले को सही माना और कहा कि किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ है। यह आदेश न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा न्यायमूर्ति राघवेन्द्र कुमार की खंडपीठ ने दीपिका राणा की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि सामान्य अध्ययन प्रश्न 117 में तीन विकल्प सही थे तथा विधि प्रश्न 23 में दो उत्तर विकल्प सही थे। याची को 272 अंक मिले तथा अंतिम सफल अभ्यर्थी को 273 अंक मिले हैं। ऐसे में उसे भी सफल घोषित किया जाये। आयोग की तरफ से फामरूले का जिक्र करते हुए कहा गया कि जिन प्रश्नों के कई उत्तर विकल्प सही है उन्हें हल करने वाले सभी को अंक दिया गया है। जो प्रश्न ही गलत है उसे निरस्त कर औसत अंक समान रूप से दिया गया है। इसके बाद परिणाम घोषित किया गया है।रजिस्टेशन विभाग के दैनिककर्मियों के मामले में जानकारी तलब : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रेशन विभाग के प्रमुख सचिव से पूछा है कि दैनिककर्मियों को नियमित करने में भेदभाव किस आधार पर किया गया। 196 तक कार्यरत कर्मी को क्यों नियमित नहीं किया और जो लोग 89 में कार्य करने के बाद 2001 से पहले भी कार्यरत रहे, उन्हें लगातार सेवा में मान कैसे नियमित कर लिया गया। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण टण्डन तथा न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपीलों पर दिया है। सुप्रीमकोर्ट ने खगेश कुमार केस में 1991 से पहले के कार्यरत कर्मियों को नियमित करने का आदेश दिया था जिसकी आड़ में अपात्रों को नियमित किया गया तथा पात्र लोगों को नियमित नहीं किया गया। अपील की सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।
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UPPCS J पीसीएसजे प्री : याचिका खारिज : लोक सेवा आयोग के फामूले को हाईकोर्ट ने माना सही
16/12/2016
UPPCS J पीसीएसजे प्री : याचिका खारिज : लोक सेवा आयोग के फामूले को हाईकोर्ट ने माना सही
विधि संवाददाता, इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीसीएसजे प्रारंभिक परीक्षा में सवालों के गलत उत्तर विकल्प को लेकर दाखिल याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने लोक सेवा आयोग के फामरूले को सही माना और कहा कि किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ है। यह आदेश न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा न्यायमूर्ति राघवेन्द्र कुमार की खंडपीठ ने दीपिका राणा की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि सामान्य अध्ययन प्रश्न 117 में तीन विकल्प सही थे तथा विधि प्रश्न 23 में दो उत्तर विकल्प सही थे। याची को 272 अंक मिले तथा अंतिम सफल अभ्यर्थी को 273 अंक मिले हैं। ऐसे में उसे भी सफल घोषित किया जाये। आयोग की तरफ से फामरूले का जिक्र करते हुए कहा गया कि जिन प्रश्नों के कई उत्तर विकल्प सही है उन्हें हल करने वाले सभी को अंक दिया गया है। जो प्रश्न ही गलत है उसे निरस्त कर औसत अंक समान रूप से दिया गया है। इसके बाद परिणाम घोषित किया गया है।रजिस्टेशन विभाग के दैनिककर्मियों के मामले में जानकारी तलब : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रेशन विभाग के प्रमुख सचिव से पूछा है कि दैनिककर्मियों को नियमित करने में भेदभाव किस आधार पर किया गया। 196 तक कार्यरत कर्मी को क्यों नियमित नहीं किया और जो लोग 89 में कार्य करने के बाद 2001 से पहले भी कार्यरत रहे, उन्हें लगातार सेवा में मान कैसे नियमित कर लिया गया। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण टण्डन तथा न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपीलों पर दिया है। सुप्रीमकोर्ट ने खगेश कुमार केस में 1991 से पहले के कार्यरत कर्मियों को नियमित करने का आदेश दिया था जिसकी आड़ में अपात्रों को नियमित किया गया तथा पात्र लोगों को नियमित नहीं किया गया। अपील की सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।
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