राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद पीसीसप्री-2016 में गलत सवालों के मामले में अपनी जीत से उत्साहित प्रतियोगी छात्रों ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के खिलाफ मुहिम तेज करने का फैसला किया है। उनके निशाने पर डा. अनिल यादव के कार्यकाल में हुई नियुक्तियां और नियुक्त किये गए विशेषज्ञ हैं। प्रतियोगी छात्रों ने कुछ सदस्यों की नियुक्ति को भी कठघरे में खड़ा किया है और उन्हें हटाने के लिए आंदोलन की जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। प्रतियोगी छात्रों की यह मुहिम अनायास नहीं है। इससे पहले पीसीएसजे प्रारंभिक परीक्षा के गलत सवालों पर भी आयोग को कोर्ट में खड़ा किया गया था लेकिन, सुप्रीम कोर्ट में मामला उनके खिलाफ गया। तब भी विशेषज्ञों की क्षमता पर भी सवाल खड़े किये गए थे। उन्होंने इस बाबत पूर्व सचिव एसके सिंह से सीधी वार्ता कर परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग भी उठाई थी। पूर्व सचिव ने उन्हें आश्वासन दिया था कि इस दिशा में प्रयास हो रहा है और विशेषज्ञ पैनल से अयोग्य व्यक्ति हटाए जाएंगे लेकिन, कुछ ही दिन बाद उनका तबादला हो गया और फिर इस बारे में आगे कुछ नहीं किया जा सका। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय कहते हैं कि आखिर क्या वजह है कि जो सवाल एक परीक्षा में गलत ठहरा दिया गया, उसे उन्हीं विकल्पों के साथ आगे परीक्षाओं में पूछा गया। उनके अनुसार इन सारे तथ्यों को हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया जाएगा।
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UPPCS Pri अब तेज होगी लोक सेवा आयोग के खिलाफ मुहिम : पीसीएसप्री परीक्षा-2016 के गलत सवालों के मामले ने तूल पकड़ा
12/12/2016
UPPCS Pri अब तेज होगी लोक सेवा आयोग के खिलाफ मुहिम : पीसीएसप्री परीक्षा-2016 के गलत सवालों के मामले ने तूल पकड़ा
राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद पीसीसप्री-2016 में गलत सवालों के मामले में अपनी जीत से उत्साहित प्रतियोगी छात्रों ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के खिलाफ मुहिम तेज करने का फैसला किया है। उनके निशाने पर डा. अनिल यादव के कार्यकाल में हुई नियुक्तियां और नियुक्त किये गए विशेषज्ञ हैं। प्रतियोगी छात्रों ने कुछ सदस्यों की नियुक्ति को भी कठघरे में खड़ा किया है और उन्हें हटाने के लिए आंदोलन की जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। प्रतियोगी छात्रों की यह मुहिम अनायास नहीं है। इससे पहले पीसीएसजे प्रारंभिक परीक्षा के गलत सवालों पर भी आयोग को कोर्ट में खड़ा किया गया था लेकिन, सुप्रीम कोर्ट में मामला उनके खिलाफ गया। तब भी विशेषज्ञों की क्षमता पर भी सवाल खड़े किये गए थे। उन्होंने इस बाबत पूर्व सचिव एसके सिंह से सीधी वार्ता कर परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग भी उठाई थी। पूर्व सचिव ने उन्हें आश्वासन दिया था कि इस दिशा में प्रयास हो रहा है और विशेषज्ञ पैनल से अयोग्य व्यक्ति हटाए जाएंगे लेकिन, कुछ ही दिन बाद उनका तबादला हो गया और फिर इस बारे में आगे कुछ नहीं किया जा सका। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय कहते हैं कि आखिर क्या वजह है कि जो सवाल एक परीक्षा में गलत ठहरा दिया गया, उसे उन्हीं विकल्पों के साथ आगे परीक्षाओं में पूछा गया। उनके अनुसार इन सारे तथ्यों को हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया जाएगा।
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