इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददातासरकारी प्राथमिक स्कूलों में डेढ़ दशक तक पढ़ाने वाले शिक्षामित्रों को सातवें वेतन आयोग में बढ़ी तनख्वाह की खुशी चार महीने भी नहीं टिकी। सहायक अध्यापक पद पर समायोजन के बाद पिछले दो साल में शिक्षामित्रों का वेतन 10 गुना से अधिक बढ़ गया।इसी वेतन के दम पर किसी ने मकान खरीद लिया तो किसी ने बड़ी गाड़ी खरीद ली लेकिन मंगलवार को गमों का ऐसा पहाड़ टूटा कि अब किसी के कुछ समझ में नहीं आ रहा। समायोजन से पहले इन शिक्षामित्रों को हर महीने 3500 रुपये मानदेय मिलता था।सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति मिलने के बाद इनका वेतन तकरीबन 30 हजार हो गया था। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद वेतन बढ़कर 38 हजार हो गया। अप्रैल, मई और जून का वेतन वृद्धि के साथ मिल भी चुका है।एक जुलाई से डीए वृद्धि मिलनी थी। लेकिन इस बीच मंगलवार को पहाड़ टूट पड़ा। किसी को भी ऐसी उम्मीद नहीं थी। इसलिए आदेश आने के बाद से ही शिक्षामित्रों और उनके परिवार के सदस्य सदमे में हैं। उनकी निगाह सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रतिलिपि मिलने के बाद न्याय विभाग को भेजी जाएगी।विधिक राय मिलने के बाद आगे की रणनीति पर विचार होगा। हालांकि इसमें थोड़ा समय लग सकता है। जबकि आदेश से प्रभावित शिक्षामित्र प्रदेश सरकार से तत्काल कोई कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
27/07/2017
UPTET SHIKSHAMITRA चार महीने भी नहीं टिकी सातवें वेतन की खुशी
इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददातासरकारी प्राथमिक स्कूलों में डेढ़ दशक तक पढ़ाने वाले शिक्षामित्रों को सातवें वेतन आयोग में बढ़ी तनख्वाह की खुशी चार महीने भी नहीं टिकी। सहायक अध्यापक पद पर समायोजन के बाद पिछले दो साल में शिक्षामित्रों का वेतन 10 गुना से अधिक बढ़ गया।इसी वेतन के दम पर किसी ने मकान खरीद लिया तो किसी ने बड़ी गाड़ी खरीद ली लेकिन मंगलवार को गमों का ऐसा पहाड़ टूटा कि अब किसी के कुछ समझ में नहीं आ रहा। समायोजन से पहले इन शिक्षामित्रों को हर महीने 3500 रुपये मानदेय मिलता था।सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति मिलने के बाद इनका वेतन तकरीबन 30 हजार हो गया था। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद वेतन बढ़कर 38 हजार हो गया। अप्रैल, मई और जून का वेतन वृद्धि के साथ मिल भी चुका है।एक जुलाई से डीए वृद्धि मिलनी थी। लेकिन इस बीच मंगलवार को पहाड़ टूट पड़ा। किसी को भी ऐसी उम्मीद नहीं थी। इसलिए आदेश आने के बाद से ही शिक्षामित्रों और उनके परिवार के सदस्य सदमे में हैं। उनकी निगाह सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रतिलिपि मिलने के बाद न्याय विभाग को भेजी जाएगी।विधिक राय मिलने के बाद आगे की रणनीति पर विचार होगा। हालांकि इसमें थोड़ा समय लग सकता है। जबकि आदेश से प्रभावित शिक्षामित्र प्रदेश सरकार से तत्काल कोई कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
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